भारत में बिज़नेस शुरू करने के लिए आप अपने पैसे और हुनर के हिसाब से आइडिया चुनते हैं, जगह ढूँढकर उसे परखते हैं, सेटअप के साथ चालू पूंजी भी अलग रखते हैं, ज़रूरी रजिस्ट्रेशन लेते हैं (आमतौर पर Shop & Establishment, नगर निगम का ट्रेड लाइसेंस, Udyam, खाने के लिए FSSAI, और GST सिर्फ़ सीमा से ऊपर), UPI QR के साथ करंट अकाउंट खोलते हैं, दाम तय करते हैं, और फिर पहले 90 दिन अपने आंकड़ों पर कड़ी नज़र रखते हैं। छोटी दुकान के लिए पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर चार से आठ हफ़्ते लगते हैं।
यह गाइड 2026 के आख़िर के असली खर्च और नियमों के साथ हर कदम समझाती है। यह छोटे, लोकल बिज़नेस (चाय की दुकान, किराना, सैलून, टिफ़िन सर्विस या रिपेयर शॉप) के लिए है, टेक स्टार्टअप के लिए नहीं।
कदम 1: अपने लायक आइडिया चुनें
ऑनलाइन क्या चल रहा है, उससे नहीं, अपने बजट, रोज़ के समय और पहले से मौजूद हुनर से शुरू करें। जो बिज़नेस आपके हुनर का इस्तेमाल करे, वह ज़्यादा कमाता है और ज़्यादा टिकता है। अगर अभी तय नहीं है, तो हमारी गाइड कौन सा बिज़नेस करें छह सवालों से आपकी छोटी लिस्ट बनवाती है, और सबसे ज़्यादा मुनाफ़े वाले बिज़नेस 30 बिज़नेस के मुनाफ़े, रिटर्न और पेबैक की तुलना करती है।
पक्का करने से पहले, किसी दूसरे इलाके में यही बिज़नेस चला रहे दो-तीन लोगों से बात करें। पूछें कि काश उन्हें पहले क्या पता होता। ज़्यादातर एक छिपा खर्च बताएँगे: चाय की दुकान में दूध, मेडिकल स्टोर में एक्सपायरी, किराना दुकान में उधार, सैलून या ब्यूटी पार्लर में स्टाफ़ का छोड़ जाना।
कदम 2: जगह ढूँढें और परखें
ज़्यादातर छोटे बिज़नेस में जगह ही सबसे ज़्यादा तय करती है।
- ग्राहक गिनें। कम से कम तीन दिन, एक वीकेंड मिलाकर, जिस समय आप दुकान खोलेंगे उसी समय मिलती-जुलती दुकानों के पास खड़े हों। घंटे में लोग गिनें और औसत बिल का अंदाज़ा लगाएँ।
- आसपास देखें। कॉलेज गेट रविवार को सूना रहता है। ऑफ़िस इलाका वीकेंड पर ख़ाली। बाज़ार का चौक दिन भर व्यस्त, पर किराया और हटाए जाने का ख़तरा ज़्यादा।
- किराये को बिक्री से मिलाएँ। हर बिज़नेस का पैमाना अलग है: हमारे नोट्स के मुताबिक अच्छी किराना में किराया बिक्री के करीब 4% से कम, सैलून में 10% या कम, और बेकरी में 10–15% होना चाहिए। 25% से ऊपर ख़तरे का निशान है।
- किरायानामा समझें। 3–10 महीने के किराये जितना डिपॉज़िट, 11 महीने का लीव-एंड-लाइसेंस एग्रीमेंट और हर साल 5–10% बढ़ोतरी आम है (अनुमान)। सब लिखित में लें।
- ठेले और स्टॉल के लिए: स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट 2014 के तहत टाउन वेंडिंग कमेटी से वेंडिंग सर्टिफ़िकेट चाहिए। बहुत से वेंडर इसके बिना चलाते हैं, जिससे वे नगर निगम के अभियानों और सामान ज़ब्ती के ख़तरे में रहते हैं।
कदम 3: बजट और चालू पूंजी का हिसाब लगाएँ
अपने पैसे को सेटअप और चालू पूंजी में बाँटें। सेटअप एक बार का खर्च है: ठेला या दुकान का डिपॉज़िट, इंटीरियर, मशीनें, बोर्ड, पहले लाइसेंस और शुरुआती माल। चालू पूंजी तब तक माल, किराया, मज़दूरी और घर का खर्च चलाती है जब तक बिज़नेस अपना खर्च न निकालने लगे, जो पहले महीने में शायद ही होता है।
आसान नियम: सेटअप के बाद कम से कम दो-तीन महीने का चलने का खर्च नकद रखें। हमारी रिसर्च से कुछ सेटअप लागत (टियर-2 के दाम):
| बिज़नेस | लागत | आम दुकान: लागत | आम दुकान: महीने का मुनाफ़ा (टियर 2 शहर) |
|---|---|---|---|
| 🥬 सब्ज़ी की दुकान | ₹20,000 | ₹20,000 | ₹17,500–₹39,000 |
| ☕ चाय की दुकान | ₹25,000 | ₹60,000 | ₹55,000–₹1.1 लाख |
| 🍱 टिफ़िन सर्विस | ₹40,000 | ₹1 लाख | ₹17,500–₹30,500 |
| 📱 मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान | ₹45,000 | ₹1.5 लाख | ₹24,000–₹69,500 |
| 💇 सैलून या ब्यूटी पार्लर | ₹1.8 लाख | ₹2.5 लाख | ₹40,000–₹78,000 |
| 🛍️ किराना दुकान | ₹2 लाख | ₹4.5 लाख | ₹8,500–₹19,500 |
| 💊 मेडिकल स्टोर | ₹6 लाख | ₹10 लाख | ₹15,000–₹50,000 |
पैसा कहाँ से आ सकता है
- मुद्रा (PMMY): शिशु ₹50,000 तक, किशोर ₹50,000–5 लाख, तरुण ₹5–10 लाख, और तरुण प्लस ₹10–20 लाख उनके लिए जिन्होंने तरुण लोन चुका दिया है। बिना गारंटी; ब्याज आमतौर पर करीब 9–14% (बैंक के हिसाब से, अनुमान)। हमारी मुद्रा लोन गाइड देखें।
- PM SVANidhi: रेहड़ी-पटरी वालों के लिए ₹15,000 → ₹25,000 → ₹50,000, हर किस्त पिछली चुकाने पर खुलती है (News on AIR)।
- PMEGP: नई यूनिट की प्रोजेक्ट लागत पर 15–35% सब्सिडी।
- स्टैंड-अप इंडिया: SC/ST और महिला उद्यमियों के लिए ₹10 लाख–1 करोड़।
"रोज़ की वसूली" वाले अनौपचारिक लोन से बचें; हमारे नोट्स इनकी लागत 5–10% महीना आँकते हैं, जो एक स्टॉल का मुनाफ़ा पूरा खा सकती है।
कदम 4: रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस लें
नियम राज्य और शहर के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए अपने नगर निगम दफ़्तर से पक्का करें। ज़्यादातर छोटे बिज़नेस को ये चाहिए।
Udyam रजिस्ट्रेशन (मुफ़्त)
Udyam सरकार का MSME रजिस्ट्रेशन है। यह मुफ़्त और ऑनलाइन है, आधार और PAN से होता है। यह दुकान चलाने की इजाज़त नहीं है, पर बैंक और योजनाएँ इसे माँगती हैं।
Shop & Establishment रजिस्ट्रेशन
ज़्यादातर राज्यों में किसी भी पक्की दुकान के लिए राज्य के शॉप्स एंड एस्टैब्लिशमेंट्स एक्ट के तहत ज़रूरी है। फ़ीस राज्य और स्टाफ़ की संख्या के हिसाब से शून्य से कुछ हज़ार रुपये तक है। दिल्ली में दुकान शुरू करने के 90 दिन के अंदर रजिस्टर करना होता है।
नगर निगम का ट्रेड लाइसेंस
यह नगर निगम या नगर परिषद देती है। फ़ीस छोटे शहरों में करीब ₹500 से लेकर मेट्रो में कुछ कामों के लिए ₹15,000–25,000 तक है। खाने के बिज़नेस को हेल्थ ट्रेड लाइसेंस भी चाहिए हो सकता है। इसे न लेने पर ₹5,000–25,000 तक जुर्माना हो सकता है (Petpooja)।
FSSAI (हर खाने के बिज़नेस के लिए)
1 अप्रैल 2026 से FSSAI बेसिक रजिस्ट्रेशन ₹1.5 करोड़ तक के टर्नओवर पर लागू है, ₹100 सालाना लगता है और बिना रिन्यूअल के मान्य रहता है; ₹1.5–50 करोड़ के लिए स्टेट लाइसेंस (FSSAI आदेश)। नगर निगम में रजिस्टर्ड वेंडर रजिस्टर्ड माने जाते हैं। यह चाय, स्ट्रीट फ़ूड, टिफ़िन, बेकरी, मिठाई और पैक्ड खाना बेचने वाली किराना पर लागू है। पूरी प्रक्रिया हमारी FSSAI रजिस्ट्रेशन गाइड में है।
GST: सिर्फ़ सीमा से ऊपर
- सामान: ₹40 लाख सालाना टर्नओवर से ऊपर रजिस्ट्रेशन ज़रूरी।
- सर्विस: ₹20 लाख से ऊपर। विशेष श्रेणी वाले राज्यों में ₹20 लाख और ₹10 लाख।
- मिली-जुली दुकानें (जैसे पार्ट्स बेचने वाली मोबाइल रिपेयर शॉप) ₹20 लाख मानें।
- कंपोज़िशन स्कीम: ₹1.5 करोड़ तक के व्यापारी टर्नओवर का 1% दे सकते हैं, पर इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा।
22 सितंबर 2025 से GST स्लैब 0, 5, 18 और 40% हैं। सैलून पर 5% बिना इनपुट क्रेडिट, केक-पेस्ट्री पर 5%, ज़्यादातर दवाओं पर 5%, और मोबाइल रिपेयर व पार्ट्स पर 18%। अगर आप Swiggy या Zomato से खाना बेचते हैं, तो उन ऑर्डर का 5% GST प्लेटफ़ॉर्म भरता है। ज़्यादा जानकारी हमारी छोटी दुकानों के लिए GST गाइड में है।
बिज़नेस के हिसाब से ख़ास लाइसेंस
- मेडिकल स्टोर: रिटेल ड्रग लाइसेंस (फ़ॉर्म 20 और 21) और रजिस्टर्ड फ़ार्मासिस्ट।
- ऑप्टिकल शॉप: कॉन्टैक्ट लेंस बेचने का रजिस्ट्रेशन और ऑप्टोमेट्रिस्ट।
- तराज़ू (सब्ज़ी, मीट, हार्डवेयर): लीगल मेट्रोलॉजी से जाँच।
- कार वॉश: प्रदूषण बोर्ड की सहमति और रोज़ 10 घन मीटर से ज़्यादा पानी पर भूजल NOC।
- बड़े भोजनालयों, मॉल और कुछ इमारतों के लिए फ़ायर NOC; कैफ़े या जिम में रिकॉर्डेड संगीत बजे तो म्यूज़िक लाइसेंस।
आम समय (LegalSuvidha): Shop & Establishment 1–3 हफ़्ते, ट्रेड लाइसेंस 2–4 हफ़्ते, GST 7–15 कामकाजी दिन। कुल चार से आठ हफ़्ते का प्लान रखें।
कदम 5: बैंक खाता खोलें और UPI लगाएँ
पहले दिन से बिज़नेस का पैसा घर के पैसे से अलग रखें।
- दुकान के नाम पर करंट अकाउंट खोलें (या कम से कम अलग सेविंग अकाउंट), Shop & Establishment सर्टिफ़िकेट या Udyam से।
- UPI QR और साउंड बॉक्स लें। Q1 FY27 में भारत के रिटेल पेमेंट की संख्या में UPI का हिस्सा 86.8% था (Outlook Business / CareEdge), हालाँकि चाय जैसे छोटे बिल पर बहुत से ग्राहक अब भी नकद देते हैं।
- डिजिटल रिकॉर्ड से लोन मिलना आसान होता है। बैंक आपकी UPI हिस्ट्री देखते हैं। PM SVANidhi लेने वालों को ₹1,600 तक डिजिटल कैशबैक मिलता है।
- टैक्स का विकल्प जानें। छोटे बिज़नेस टर्नओवर के 8% (डिजिटल पेमेंट पर 6%) पर अनुमानित आयकर (presumptive tax) चुन सकते हैं।
- अगर स्टाफ़ रखें: 21 नवंबर 2025 से लागू चार लेबर कोड छोटी दुकानों में भी नियुक्ति पत्र और समय पर वेतन माँगते हैं। ESI 10 या ज़्यादा कर्मचारियों पर और PF 20 या ज़्यादा पर लागू होता है।
कदम 6: दाम तय करें
लागत से ऊपर की ओर दाम बनाएँ, फिर इलाके के चलन से मिलाएँ।
- हर चीज़ की लागत जानें। कच्चा माल, पैकिंग, गैस और मेहनत का हिस्सा जोड़ें। बेकरी में आम नियम है लागत × 2, जिससे करीब 50% ग्रॉस मार्जिन मिलता है।
- दाम की सीढ़ी का ध्यान रखें। छोटे बिल पर ग्राहक सिक्के पर प्रतिक्रिया देते हैं, प्रतिशत पर नहीं। हमारी चाय रिसर्च का अनुमान है कि कप जब ₹10 से ₹12 या ₹15 से ₹20 जैसी सीमा पार करता है, तो बिक्री 15–30% गिरती है।
- MRP छत है। पैक्ड सामान पर सिर्फ़ छूट दे सकते हैं, MRP से ज़्यादा कभी नहीं। इसीलिए किराना का ग्रॉस मार्जिन करीब 8–15% है।
- खाने की लागत देखें। भोजनालयों में मेन्यू दाम का 28–35% सामग्री ठीक है; 35% से ऊपर चेतावनी है।
- उधार की नीति पहले दिन से पहले तय करें। उधार से ग्राहक जुड़ते हैं, पर हमारे नोट्स 60 दिन से पुराने बकाये को डूबा हुआ मानते हैं।
कदम 7: आपके पहले 90 दिन
पहले तीन महीने तय करते हैं कि दुकान टिकेगी या नहीं।
दिन 1–30: छोटा खोलें, जल्दी सीखें
- छोटे मेन्यू या कम सामान से शुरू करें। जल्दी ख़राब होने वाला माल रोज़ थोड़ा-थोड़ा मँगाएँ।
- हर बिक्री और हर खर्च लिखें, काग़ज़ पर ही सही। हो सके तो कोई मुफ़्त बिलिंग ऐप इस्तेमाल करें।
- पहले 50 ग्राहकों से पूछें कि वे क्या बदलना चाहेंगे।
दिन 31–60: जो रिस रहा है उसे ठीक करें
- सबसे ज़्यादा बिकने वाली चीज़ें और बर्बादी पहचानें। सब्ज़ी में बर्बादी 2 पॉइंट बढ़ने से हफ़्ते का करीब 10% मुनाफ़ा जा सकता है।
- देखें कि भीड़ के समय लाइन देखकर ग्राहक लौट तो नहीं रहे। यह खोई बिक्री भी है और खोई साख भी।
- पक्के ग्राहकों की WhatsApp लिस्ट बनाएँ और Google Maps पर रिव्यू लें।
दिन 61–90: तय करें कि किसे बढ़ाना है
- महीने के मुनाफ़े की तुलना नौकरी की कमाई से करें। ईमानदार रहें।
- ऐसी एक चीज़ या सर्विस जोड़ें जो औसत बिल बढ़ाए, जैसे चाय के साथ बिस्किट या सैलून में फ़ेशियल।
- अगले सीज़न की तैयारी करें: बारिश, नवरात्रि–दिवाली, शादी के महीने या स्कूल खुलना, जो आपके बिज़नेस पर लागू हो।
साख धीरे बनती है और जल्दी गिरती है। खाने की एक गड़बड़ या एक हफ़्ते का रूखा व्यवहार महीनों की मेहनत पर पानी फेर सकता है।
सिम्युलेटर में मुफ़्त आज़माएँ: किराना दुकान
पैसा लगाने से पहले इस बिज़नेस का एक असली जैसा हफ़्ता 5 मिनट में चलाएँ।
सिम्युलेटर में मुफ़्त आज़माएँ →पहली बार दुकान खोलने वालों की आम गलतियाँ
- सारी बचत इंटीरियर में लगा देना और चालू पूंजी न रखना।
- भीड़ नहीं, सिर्फ़ किराया देखकर जगह चुनना।
- "ग्राहक बनाने" के लिए पहले महीने में सबको उधार देना।
- अपनी और परिवार की बिना पैसे वाली मेहनत को न गिनना।
- इंस्पेक्टर आने तक लाइसेंस को नज़रअंदाज़ करना।
- अपनी लागत जाने बिना प्रतिद्वंद्वी के दाम की नकल करना।
पैसा लगाने से पहले आज़माएँ
किरायानामे पर साइन करने से पहले अपने आइडिया को कुछ सिम्युलेटेड हफ़्तों में चलाकर देखें। BizGame एक मुफ़्त सीखने वाला गेम है, पैसा कमाने का तरीका नहीं: इसमें आप दाम तय करते हैं, माल मँगाते हैं, स्टाफ़ रखते हैं और बारिश, त्योहार व जाँच का सामना करते हैं, हर हफ़्ता करीब पाँच मिनट में, हमारी रिसर्च की लागत के साथ। अपनी पहली गलतियाँ करने का यह सबसे सस्ता तरीका है।
सिम्युलेटर में मुफ़्त आज़माएँ: चाय की दुकान
पैसा लगाने से पहले इस बिज़नेस का एक असली जैसा हफ़्ता 5 मिनट में चलाएँ।
सिम्युलेटर में मुफ़्त आज़माएँ →





