मुद्रा लोन प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत मिलने वाला बिना गारंटी वाला बिज़नेस लोन है, जो बैंक, NBFC और माइक्रोफ़ाइनेंस संस्थाएँ छोटे (गैर-खेती) बिज़नेस को देती हैं। इसकी चार श्रेणियाँ हैं: शिशु ₹50,000 तक, किशोर ₹50,000–5 लाख, तरुण ₹5–10 लाख, और तरुण प्लस ₹10–20 लाख, जो सिर्फ़ उन्हें मिलता है जिन्होंने पहले तरुण लोन चुकाया हो। योजना सरकारी है, पर लोन देना है या नहीं, कितना और किस ब्याज पर, ये बैंक ही तय करता है। इसलिए मंज़ूरी अपने आप नहीं मिलती।
इस लेख में हम बताएँगे कि कौन पात्र है, कौन-से काग़ज़ लगते हैं, बैंक मैनेजर आपकी फ़ाइल को असल में कैसे देखता है, और हमारे रिसर्च किए चार बिज़नेस में EMI कितनी बनेगी। साथ ही ये भी कि कब कोई दूसरी योजना (PM SVANidhi, PMEGP, किसान क्रेडिट कार्ड, स्टैंड-अप इंडिया) ज़्यादा सही बैठती है।
शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस क्या हैं?
ये श्रेणियाँ सिर्फ़ लोन की रकम बताती हैं। रकम बढ़ने के साथ काग़ज़ और बैंक की जाँच भी बढ़ती जाती है।
| श्रेणी | लोन रकम | आम इस्तेमाल |
|---|---|---|
| शिशु | ₹50,000 तक | चाय का ठेला, सब्ज़ी का ठेला, सिलाई मशीन, रिपेयर का औज़ार |
| किशोर | ₹50,000 – ₹5 लाख | छोटी दुकान का फ़र्नीचर, शुरुआती स्टॉक, घर से पार्लर, छोटी किचन |
| तरुण | ₹5 – ₹10 लाख | मेडिकल स्टोर, क्लाउड किचन, छोटा कैफ़े |
| तरुण प्लस | ₹10 – ₹20 लाख | विस्तार के लिए, सिर्फ़ पिछला तरुण लोन चुकाने वालों को |
ये सीमाएँ हमारे सभी रिसर्च नोट्स और उनमें दिए 2026 के स्रोतों में एक जैसी हैं (OkCredit; IIFL)। ब्याज हर बैंक अपना तय करता है। हमारे नोट्स के अनुमान से छोटे मुद्रा लोन पर बैंक 9–14% सालाना लेते हैं, जबकि बिना गारंटी के NBFC लोन 16–30% और साहूकार 2–5% महीना लेते हैं। यही फ़र्क़ बताता है कि काग़ज़ी काम के बावजूद मुद्रा लोन क्यों फ़ायदेमंद है।
मुद्रा लोन के लिए कौन पात्र है?
मोटे तौर पर कोई भी भारतीय व्यक्ति, प्रोप्राइटरशिप या पार्टनरशिप जो मैन्युफ़ैक्चरिंग, ट्रेडिंग या सर्विस में छोटा कमाई वाला बिज़नेस चला रहा है या शुरू करना चाहता है। हमारे लगभग सभी गाइड इसमें आते हैं: किराना दुकान, मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान रिपेयर काउंटर, सैलून या ब्यूटी पार्लर, सिलाई की दुकान या बुटीक, क्लाउड किचन, स्ट्रीट फ़ूड का ठेला स्टॉल।
बैंक असल में ये देखते हैं:
- उम्र 18 साल या ज़्यादा और सही KYC।
- पुराना डिफ़ॉल्ट न हो। ख़राब क्रेडिट स्कोर या कोई बकाया लोन रिजेक्शन की सबसे आम वजह है।
- असली बिज़नेस। या तो चलती दुकान जिसकी बिक्री का कुछ रिकॉर्ड हो, या नए बिज़नेस का साफ़ प्लान और कोटेशन।
- चुकाने की क्षमता। महीने का मुनाफ़ा EMI से आराम से ज़्यादा होना चाहिए।
खेती ख़ुद मुद्रा में नहीं आती। डेयरी और पोल्ट्री जैसे काम के लिए आम तौर पर किसान क्रेडिट कार्ड लिया जाता है (नीचे देखें)।
मुद्रा लोन के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
हर बैंक और श्रेणी की सूची थोड़ी अलग होती है, इसलिए ब्रांच से उसकी चेकलिस्ट माँगें। ज़्यादातर बैंक ये माँगते हैं:
- पहचान और पते का प्रमाण: आधार, PAN, वोटर ID वग़ैरह, और पासपोर्ट फ़ोटो।
- बिज़नेस का प्रमाण: उद्यम रजिस्ट्रेशन (मुफ़्त, और इससे MSME योजनाएँ खुलती हैं), शॉप एंड एस्टैब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन, ट्रेड लाइसेंस, खाने के बिज़नेस के लिए FSSAI रजिस्ट्रेशन, और GST हो तो उसका नंबर।
- कोटेशन: मशीन, फ़र्नीचर और शुरुआती स्टॉक के। बैंक अक्सर पैसा सीधे सप्लायर को देता है।
- बैंक स्टेटमेंट, आम तौर पर पिछले 6–12 महीने के।
- छोटी प्रोजेक्ट रिपोर्ट (किशोर और ऊपर के लिए): क्या बेचेंगे, कितनी बिक्री, ख़र्च, मुनाफ़ा और EMI।
- दुकान की जगह का प्रमाण: किराया एग्रीमेंट या मालिकाना काग़ज़।
शिशु में फ़ाइल हल्की रहती है। तरुण में बैंक इनकम टैक्स रिटर्न और ठीक-ठाक अनुमान माँगेगा।
बैंक मुद्रा आवेदन पर फ़ैसला कैसे करता है?
बैंक मैनेजर ये नहीं देखता कि आइडिया कितना शानदार है। वो ये देखता है कि पैसा वापस आएगा या नहीं। असल में पाँच चीज़ें जाँची जाती हैं:
- क्रेडिट स्कोर और हिस्ट्री। फ़ोन या बाइक लोन की छूटी हुई EMI भी नुकसान करती है।
- EMI बनाम मुनाफ़ा। अगर EMI अनुमानित मासिक मुनाफ़े के लगभग एक-तिहाई से आधे से ज़्यादा हो, तो ज़्यादातर बैंक हिचकते हैं। ये अनुभव की बात है, कोई लिखा हुआ नियम नहीं।
- आपका अनुभव। जो नाई पाँच साल सैलून में काम कर चुका है और अब अपनी कुर्सी चाहता है, उसे "हाँ" कहना आसान है।
- आपका अपना पैसा। प्रोजेक्ट का 10–20% भी ख़ुद लगाएँ तो बैंक को भरोसा होता है।
- खाते में लेन-देन। UPI और करंट अकाउंट से बिक्री दिखती है। पूरी तरह कैश वाली दुकान का कोई रिकॉर्ड नहीं दिखता।
अगर ब्रांच मना करे, तो वजह लिखित में पूछें। दूसरी जगह अप्लाई कर सकते हैं, पर पहले वो कमी ठीक करें।
चार छोटे बिज़नेस के लिए असली EMI उदाहरण
नीचे के उदाहरणों में सेटअप ख़र्च हमारे बिज़नेस गाइड (टियर-2 शहर के दाम) से लिया गया है और मुनाफ़ा उसी रिसर्च के बेंचमार्क से। ब्याज दर सिर्फ़ समझाने के लिए मानी गई है, आपके बैंक की दर अलग होगी।
चाय की टपरी: ₹50,000 का शिशु लोन
हमारे चाय की दुकान गाइड में सड़क किनारे की टपरी लगभग ₹60,000 में लगती है। ₹50,000 को 12% पर 24 महीने के लिए लें तो EMI लगभग ₹2,350 बनती है, और कुल ब्याज करीब ₹6,500। चलती टपरी की कमाई के सामने ये छोटी रकम है। असली जोखिम दूध की बर्बादी और अतिक्रमण हटाओ अभियान है, EMI नहीं।
मोबाइल रिपेयर की दुकान: ₹1.5 लाख का किशोर लोन
हमारे मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान गाइड में दो बेंच वाली रिपेयर और एक्सेसरीज़ की दुकान करीब ₹1.5 लाख में बनती है। 11% पर तीन साल में EMI लगभग ₹4,900, कुल ब्याज करीब ₹27,000। टियर-2 में इस दुकान का बेंचमार्क मुनाफ़ा करीब ₹24,000–69,000 महीना है (अनुमान), इसलिए जगह सही हो तो EMI संभल जाती है।
छोटी किराना दुकान: ₹3.5 लाख का किशोर लोन
200 वर्ग फ़ुट की किराना दुकान करीब ₹4.5 लाख में बनती है। ₹3.5 लाख को 11% पर तीन साल के लिए लें तो EMI लगभग ₹11,500। रिसर्च में टियर-2 की छोटी किराना का बेंचमार्क सिर्फ़ ₹2,000–4,500 हफ़्ता, यानी ₹8,700–19,500 महीना है। मतलब मंदे महीने में EMI पूरा मुनाफ़ा खा सकती है। यही सबसे आम ग़लती है: किराना कम मार्जिन और ज़्यादा स्टॉक वाला बिज़नेस है, इसके लिए भारी लोन लेना जोखिम है। लंबी अवधि या छोटा लोन (घर के आगे की दुकान से शुरुआत, करीब ₹2 लाख) ज़्यादा सुरक्षित है। किराना दुकान गाइड देखें।
क्लाउड किचन: ₹6 लाख का तरुण लोन
300 वर्ग फ़ुट का स्टैंडर्ड क्लाउड किचन करीब ₹7 लाख का है। 10.5% पर पाँच साल में EMI लगभग ₹12,900, और कुल ब्याज करीब ₹1.7 लाख। टियर-2 बेंचमार्क ₹3,500–9,500 हफ़्ता (₹15,000–41,000 महीना) है। ऐप्स का असली हिस्सा 28–40% तक जाता है, इसलिए पहले साल कई किचन मुश्किल में रहते हैं। लोन से पहले क्लाउड किचन गाइड ज़रूर पढ़ें।
| बिज़नेस | लागत | आम दुकान: लागत | आम दुकान: महीने का मुनाफ़ा (टियर 2 शहर) |
|---|---|---|---|
| ☕ चाय की दुकान | ₹25,000 | ₹60,000 | ₹55,000–₹1.1 लाख |
| 📱 मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान | ₹45,000 | ₹1.5 लाख | ₹24,000–₹69,500 |
| 🛍️ किराना दुकान | ₹2 लाख | ₹4.5 लाख | ₹8,500–₹19,500 |
| 🥡 क्लाउड किचन | ₹5.5 लाख | ₹7 लाख | ₹15,000–₹41,000 |
| 💇 सैलून या ब्यूटी पार्लर | ₹1.8 लाख | ₹2.5 लाख | ₹40,000–₹78,000 |
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सिम्युलेटर में मुफ़्त आज़माएँ →मुद्रा सही न बैठे तो क्या विकल्प हैं?
ठेले वालों के लिए PM SVANidhi
अगर आपका ठेला, गाड़ी या फ़ुटपाथ स्टॉल है, तो PM SVANidhi अक्सर मुद्रा से आसान है। इसमें बिना गारंटी पहले ₹15,000, फिर ₹25,000, फिर ₹50,000 का लोन मिलता है, हर किस्त पिछली चुकाने पर। योजना 31 मार्च 2030 तक खुली है। इसके लिए नगर निकाय का वेंडिंग सर्टिफ़िकेट या सिफ़ारिश पत्र (LoR) चाहिए (News on AIR)। योजना में 7% ब्याज सब्सिडी और डिजिटल पेमेंट पर ₹1,600 तक कैशबैक है। मई 2026 तक करीब 75.5 लाख वेंडर 1.12 करोड़ लोन ले चुके थे (IANS)। ये स्ट्रीट फ़ूड का ठेला, चाय की दुकान, सब्ज़ी की दुकान और गन्ने के जूस का बिज़नेस के ठेलों के लिए सही है।
नई यूनिट पर सब्सिडी के लिए PMEGP
प्रधानमंत्री रोज़गार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) में प्रोजेक्ट लागत पर 15–35% सब्सिडी मिलती है (महिलाओं, SC/ST और ग्रामीण आवेदकों को ज़्यादा)। सर्विस प्रोजेक्ट ₹20 लाख तक हो सकता है, जिसका 90–95% बैंक देता है (गंजाम PMEGP दस्तावेज़, 2026)। ये नई मैन्युफ़ैक्चरिंग और सर्विस यूनिट के लिए है। सिर्फ़ ख़रीद-बिक्री (जैसे कपड़े की दुकान) आम तौर पर पात्र नहीं, पर सिलाई की दुकान या बुटीक, सैलून या ब्यूटी पार्लर या कैफ़े पात्र हो सकते हैं। आवेदन KVIC और ज़िला उद्योग केंद्र से होता है और मुद्रा से ज़्यादा समय लगता है।
डेयरी और पोल्ट्री के लिए किसान क्रेडिट कार्ड
डेयरी फ़ार्म या मुर्गी फार्म फ़ार्म के लिए किसान क्रेडिट कार्ड सस्ता पड़ता है: ₹3 लाख तक 7% पर, और समय पर चुकाने पर असल ब्याज सिर्फ़ 4%। पशुपालन की उप-सीमा ₹2 लाख है, और ₹2 लाख तक (दूध संघ से जुड़ाव हो तो ₹3 लाख तक) बिना गारंटी (RBI)। बैंक से पूछ लें कि 2026-27 की ब्याज छूट लागू है या नहीं।
महिलाओं और SC/ST के लिए स्टैंड-अप इंडिया
स्टैंड-अप इंडिया बड़े नए प्रोजेक्ट के लिए है: महिला और SC/ST उद्यमियों को ₹10 लाख से ₹1 करोड़। ये ठीक-ठाक बेकरी, बुटीक या मध्यम रेस्टोरेंट के लिए है, ठेले के लिए नहीं।
दर्ज़ियों के लिए PM विश्वकर्मा
PM विश्वकर्मा के 18 पेशों में दर्ज़ी भी है: ₹15,000 का टूलकिट ई-वाउचर और 5% पर पहले ₹1 लाख, फिर ₹2 लाख का लोन। लेकिन अगर आप पहले मुद्रा, PMEGP या PM SVANidhi ले चुके हैं तो ये नहीं मिलेगा, इसलिए सोच-समझकर चुनें (Drishti IAS)।
मुद्रा लोन कैसे लें: स्टेप बाय स्टेप
- उद्यम रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन करें। ये मुफ़्त है।
- अपना हिसाब लिखें: सेटअप ख़र्च, महीने की बिक्री, ख़र्च, मुनाफ़ा और कितनी EMI झेल सकते हैं। हमारे गाइड में टियर के हिसाब से आँकड़े हैं, वहाँ से शुरू करें।
- सप्लायर से कोटेशन लें, मशीन और स्टॉक के।
- पहले अपने बैंक जाएँ। जिस बैंक में आपका बचत खाता है, वो आपको जानता है। सरकार के JanSamarth पोर्टल या बैंक की वेबसाइट से ऑनलाइन भी अप्लाई कर सकते हैं।
- पूरा ख़र्च पूछें: ब्याज, प्रोसेसिंग फ़ीस, बीमा और कुल चुकाने वाली रकम।
- पैसा सिर्फ़ बिज़नेस में लगाएँ। बैंक जाँच कर सकता है, और बिज़नेस लोन को दूसरी जगह लगाना क्रेडिट बिगाड़ने का सबसे तेज़ तरीका है।
"पक्का मुद्रा लोन दिलवाएँगे" कहकर फ़ीस माँगने वाले एजेंटों से बचें। कोई सरकारी बिचौलिया नहीं होता, और लोन की गारंटी कोई नहीं दे सकता।
पहली बार लोन लेने वालों की आम ग़लतियाँ
- पूरा सेटअप लोन से करना। दुकान छह महीने मंदी रहे, तब भी हर EMI देनी है। छोटा शुरू करें और कम से कम दो-तीन महीने के किराए और तनख़्वाह जितना कैश अलग रखें।
- वर्किंग कैपिटल भूल जाना। कई लोग काउंटर और फ़्रिज के लिए लोन लेते हैं और दूसरे महीने स्टॉक के पैसे ख़त्म हो जाते हैं।
- बहुत छोटी अवधि चुनना। लंबी अवधि में ब्याज ज़्यादा लगता है, पर EMI छोटी रहती है और चूकने का ख़तरा कम।
- घर और दुकान का पैसा मिलाना। अलग खाता रखें। इससे अगला लोन (किशोर से तरुण, फिर तरुण प्लस) बहुत आसान होता है।
पैसा लगाने से पहले आज़माएँ
लोन पर साइन करने से पहले BizGame के मुफ़्त सिम्युलेटर में कुछ सीज़न खेलकर देखें। गेम में लोन ले सकते हैं, हर हफ़्ते EMI कटते देख सकते हैं, और समझ सकते हैं कि बारिश का मंदा मौसम या प्राइस वॉर किराना दुकान या मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान दुकान पर क्या असर डालता है। ये सीखने का खेल है, पैसा कमाने का ज़रिया नहीं, पर नकली पैसा गँवाने में कोई नुकसान नहीं।
सिम्युलेटर में मुफ़्त आज़माएँ: मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान
पैसा लगाने से पहले इस बिज़नेस का एक असली जैसा हफ़्ता 5 मिनट में चलाएँ।
सिम्युलेटर में मुफ़्त आज़माएँ →






